गुरुवार, 10 जनवरी 2008

साधू और शैतान में क्या फर्क होता है?

संतन के हित रहत है सब के हित की बात।

घट-घट देखें अलख को,पूछें जाति ना पाति॥





आज साधू कौन है और शैतान कौन है? इसे पहचानना बहुत कठिन हो चुका है। कारण साफ है,क्योंकि आज शैतान ने साधू का मुखोटा लगा रखा है।ऐसे में कोई भी धोखा खा सकता है। आज साधू को पहचानना भी मुश्किल है क्योंकि वह बहुत कम हो चुके हैं। ऐसे में साधू और शैतान को परखनें के कुछ आधार हैं।

१. साधू अपनी बात को कहता है उसे आप माने या ना मानें यह आप पर छोड़ देता है और शैतान अपनी बात कह कर उसे मनवाना चाहता है,साम,दाम दंड,भेद की मदद से।



२. शैतान स्वार्थ को लेकर आपके पास आता है,जबकि साधू निस्वार्थी भाव से।

4 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा ने कहा…

शॆतान, साधु बन कर ठगता हे ओर आज कल के साधू का असली रुप तो अब बताने की जरुरत ही नही,जो ऊचे सिहसन पर बेठे,एअरकन्डिसन कार के बिना बात ना करे,कपडो पर दाग ना लगे(चरित्र की बात नही )ओर सुनदर दासिया हो बडे घर की,गुण्डे बदमाश राजनेताओ की छत्र्छाया हो,गरीब को पास ना फ़टकने दे वोही कल्युग का साधुमहाराज धिराज,दुख्निवारन हे

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

भाई अपने देश मे हाई टेक शैतान साधुओ क़ी कमी नही है बस ज़रूरत है उन्हे सही पहचान करने वालो क़ी

Shastriji ने कहा…

आपने इस लेख को "फुल जस्टिफाई" किया है. यह इंटरनेट एस्क्प्लोरर में तो सही दिखता है, लेकिन फायरफाक्स में इसका एक शब्द भी नहीं पढा जाता है. सारे के सारे अक्षर खंडित हैं.

चूंकि आज जाल पर 50% अधिक फायरफाक्स या उसके इंजन पर अधारिक ब्राउसरों का प्रयोग करते हैं, अत: हिन्दीजगत के आधे से अधिक लोग आप का चिट्ठा नहीं पढ पाते.

जब कोई चिट्ठा पढने की स्थिति में नहीं है तो लोग उसे छोड कर आगे बढ जाते हैं. उनको कोई नुक्सान नहीं लेकिन चिट्ठाकार को नुक्सान है क्योंकि जिन लोगों के लिये उसने मेहनत से यह चिट्ठा तय्यार किया है उसमें से आधे लोग इसे पढ नहीं पाते हैं.

कृपया भविष्य में सिर्फ "लेफ्ट जस्टिफाई" का प्रयोग करें जिस से आपके चिट्ठे पर आने वाले 100% लोग इसे पढ सकें.

mehek ने कहा…

sahi kaha aaj ke yug mein shaitan kaun sadhu kaun kaise pehchane.

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