शुक्रवार, 20 मार्च 2009

फरीद के श्लोक -२५


फरीदा बुरे भला करि,गुसा मनि न हढाइ॥
देही रोगु न लगई पलै सभु किछु पाइ॥७८॥

फरीदा पंख पराहुणी,दुनी सुहावा भागु॥
नऊबति वजी सुबह सिऊ,चलण का करि साजु॥७९॥

फरीदा राति कबूरी वंडीऎ, सुतिआ,मिलै न भाउ॥
जिंना नैण नींद्वावले,तिंना मिलणु कुआउ॥८०॥

फरीद जी कहते है कि हमारे साथ जो बुरा करता है हमें उस के साथ भी भला ही करना चाहिए।
यदि कोई हमारा बुरा करता है तो उस पर गुस्सा भी नही होना चाहिए।ऐसा करने से शरीर को रोगादी
नही लगते।ऐसे करने से सभी पदार्थ(अर्थात अच्छे गुण)अपने पास ही रहते हैं।अर्थात फरीद जी कहना चाहते हैं
हमें कभी भी किसी का बुरा नही करना चाहिए और ना ही बुरा करने वाले के प्रति क्रोध करना चाहिए।क्युँ कि क्रोध
करने के कारण अनेक अवगुण हमारे भीतर आने लगते हैं।क्रोध के कारण हमारे भीतर अविवेक,चिन्ता व भ्रम आदि पैदा हो जाते हैं। जिस कारण हमारा मन व तन दोनों ही रोगग्रस्त हो सकते हैं।इस लिए यदि हम इस से अपना बचाव कर लेते हैं तो हमारे भीतर शांती,विवेक,सयंम आदि गुण पैदा हो जाते हैं।जिस से अंतत: हमे लाभ होता है।

आगे फरीद जी कहते है कि यह जो पंछी को उड़ने के लिए पंख मिले हुए है।इस से दुनिया के सभी सुखो को
भोग सकता है।लेकिन यह मत भूल जाना कि जब तू इस सुबह का आनंद उठा रहा होगा तो यह भी याद
रखना होगा कि तुझे यहाँ से जाना भी पड़ेगा।इस लिए सचेत हो कर अपने कार्यो को करना।अर्थात फरीद जी कहना
चाहते है कि यह जो हमे सुन्दर जीवन मिला है,इस का हमे सदुपयोग करना चाहिए।क्युँकि हम जैसे ही
दुनिया में आते है वैसे ही हमारे जानें की घड़ी भी करीब आने लगती है।इस लिए हमे हमेशा सावधानी पूर्वक अपने
कर्म करने चाहिए।

आगे फरीद जी कहते हैं कि यह जो रात है इस समय यह रात कस्तूरी बाँटती है। लेकिन जो इस समय सोये रहते हैं,
उन को इस को पानें का लाभ नही मिलता। क्युँकि जिनकी आँखों में नींद होती है।उन्हें सोये रहने के कारण इस का लाभ कैसे मिल सकता है?अर्थात फरीद जी कहना चाहते हैं कि रात का समय बहुत शांत होता है(रात अर्थात दुख के समय हम प्रभु को याद करने लगते हैं)ऐसे समय में हमे उस परमात्मा का ध्यान करके,इसका लाभ उठाना चाहिए।लेकिन जो लोग ऐसे समय में भी सचेत नही होते,उन को यह कस्तूरी रूपी प्रभु के नाम का लाभ कैसे मिल सकता है?