सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

कबीर के श्लोक - ८


कबीर संतन की झुंगीआ भली,भठि कुसती गाउ॥
आगि लगऊ तिह धउलहर,जिह नाही हरि को नाउ॥१५॥

इस श्लोक मे कबीर जी अपने निजि विचार व्यक्त कर रहे हैं कि यदि कोई संत है, परमात्मा का प्यारा है।ऐसे संत की छोटी सी झोपड़ी भी मुझे भली दिखती है,अच्छी दिखती है। जबकि बुरे इन्सान या असंत प्रवृति के व्यक्ति के पास यदि पूरा गाँव भी हो तो वह भी मुझे जलती हुई भट्ठी के समान लगता है।क्योकि ऐसी जगह मे हमेशा तृष्णा की आग मे जीव जलता रहता है। क्योकि वहाँ पर उस परमात्मा का नाम नही है।

कबीर जी कहना चाहते हैं कि किसी के अमीर या गरीब होने से कोई फर्क नही पड़ता।वह चाहे झोपड़ी मे रहता हो या पूरे गाँव का मालिक हो।यदि वह ईश्वर से दूर है तो हमेशा विषय विकारों की आग मे जलता रहेगा।लेकिन  यदि उसकी प्रवृति परमात्मा की ओर है, वह परमात्मा के प्रति समर्पित भाव रखता है तो आनंदित रहेगा।

कबीर संत मुऐ किआ रोईऐ,जे अपुने ग्रिहि जाहि॥
रोवहु साकत बापुरे,जु हाणै हाट बिकाइ॥१६॥

कबीर जी कहते है कि किसी संत के मरने पर अफसोस या दुखी हो कर रोने  की कोई जरूरत नही है क्योकि वह तो अपने घर जाता है। जहाँ से उसे अब कोई नही निकालने वाला। यदि रोना है तो उसके मरने पर रोना चाहिए जो इस संसार मे आ कर उस परमात्मा को नही पा सका।परमात्मा को ना पाने के कारण उसे फिर फिर जनम लेकर भटकना पड़ेगा।

इस श्लोक मे कबीर जी कहना चाहते है कि यदि  हम उस परमपद को अपने जीते जी पा लेते है तो हमारी मुक्ति संभव हो जाती है।लेकिन हम यदि संसारी बातों मे व्यस्त रहते हैं, विषय विकारों मे फँसे रहते हैं तो हमे परम शांती की प्राप्ती कभी नही होती।ऐसे लोगो के मरने पर रोना ही पड़ता है क्योकि वे अपना जीवन व्यर्थ ही गँवा कर जाते हैं।ऐसे लोग को फिर से कई जूनो मे भटकना पड़ेगा।



6 टिप्पणियाँ:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

संसारिक उठापटक में लगे रहने सेमुक्ति नही मिल सकती है....कबीर जी की एक एक शब्द आज अमर हो चुके है...एक महान कवि कबीर जी को नमन है..

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

महान संत को यूं पुन: याद कर अच्छा लगा.

AlbelaKhatri.com ने कहा…

संतों की वाणी हमें संक्षेप में ही सारी बात समझा देती है । सचमुच.........एक एक लफ्ज़ कबीर जी का अनेक शास्त्रों पर भारी है ..काश ! हम अपने जीवन में इन बातों को अंगीकार किया होता .....

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

संत कबीर के विचार और व्याख्या के लिए आभार!

ज्योति सिंह ने कहा…

sant kabir ki bani to amrit rahi aur aap ise sab tak pahunchakar kar nek karya kar rahi hai ,hum aabhari hai aapke ,aaj ki aham jaroort .tabhi to krishn bhagvaan bhi doroyadhan ke meve tyag vidur ke yahan bhojan grahn kiya .dhan nahi man ki ahmiyat hai .

aa ने कहा…
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